भारतीय महिला को मेंबर आफ द ब्रिटिश एंपायर सम्मान
लंदन। भारत से 1993 में ब्रिटेन पहुंची एक भारतीय महिला ने सोचा न होगा कि एक छोटे से बच्चे की उनकी नस्ल पर की गई टिप्पणी उनकी जिंदगी बदल देगी। इस टिप्पणी के बाद किए उनके कार्यों की बदौलत मूल रूप से केरल की निवासी शोभा दास को मेंबर आफ द ब्रिटिश एंपायर [एमबीई] पदवी से सम्मानित किया जा रहा है।
   अब तक ब्रिस्टल आधारित समूह सपोर्ट अगेंस्ट रेसिस्ट इंसीडेंट्स [सारी] चैरिटी फाउंडेशन की उपनिदेशक रहीं दास बताती हैं 1997 में ब्रिस्टल की एक सड़क पर पांच वर्षीय एक बच्चे ने उनकी नस्ल पर टिप्पणी की।
   दास ने कहा कि मैं वह घटना कभी नहीं भूलूंगी। इसी के बाद नस्लवाद को चुनौती देने की मेरी भूख बढ़ी। मैं सारी से जुड़ गई और 2008 में इस संगठन के उपनिदेशक पद पर पहुंच कर इसे छोड़ा। मैंने पुलिस और कई परिषदों को नस्लवाद से प्रेरित मामलों को सुलझाने के तरीकों को सुधारने में भी मदद की।
   ब्रिटेन की महारानी के जन्मदिन के सम्मानित अतिथियों की सूची की कल घोषणा हुई, जिसमें दास का नाम भी शामिल था। दास ने कहा कि एमबीई सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि सारी के सभी सहयोगियों के लिए है। यह ब्रिटेन में नस्लवाद विरोधी काम की पहचान है। वर्तमान में जिनेवा में एमबीए की पढ़ाई पूरी कर रहीं दास आगे मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं।
  
 
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